“ॐ का रहस्य: आत्मा से परमात्मा तक की यात्रा”

परिचय:-

ॐ – Adhyatmik Shakti aur Dhvani ka Rahasya”

Om ॐ शब्द बहुत पवित्र माना जाता है । यह ईश्वर के मुख से निकलने वाला पहला शब्द था। जिसने इस संसार की रचना में प्राण डालें, यह एक महत्वपूर्ण धार्मिक आध्यात्मिक ध्वनि का प्रतीक है। जब हम ध्यान लगाते हैं, तो यह अपने आप अंदर महसूस होता है।

इसे हिंदू धर्म में अत्यंत महत्व दिया जाता है, कुछ मान्यताओं के अनुसार ओम की उत्पत्ति भगवान शिव के मुख से हुई ओम के उच्चारण में बहुत शक्ति होती है |

ओम om ॐ के केवल उच्चारण मात्र से हमारे आसपास की नकारात्मकता सकारात्मकता मैं बदल जाती है। इसे उपनिषदों ,भगवत गीता और अन्य धार्मिक ग्रंथो मैं भी उच्चारित किया गया है। जो भी प्रतिदिन ओम का उच्चारण करता है उसमें आत्म बल और शांति बढ़ती है।

ओम ॐ शब्द का अर्थ और महत्त्व :-Om meaning –

ओम Om को अनहद नाद कहते हैं जो हर एक व्यक्ति के भीतर और ब्रह्मांड में गूंजता रहता है ।इसके गूंजते रहने का कोई कारण नहीं है आमतौर पर किसी पर किसी भी चीज के टकराने से ध्वनि उत्पन्न होती है लेकिन अनाहत यानी कि ओम को उत्पन्न नहीं किया जा सकता है। सिक्ख लोग एक ओंकार सतनाम कहते हैं मुस्लिम आमीन कहते हैं जैन धर्म में परमेष्टि का प्रतीक बताया गया है।

ओम om का उच्चारण करते समय तीन अक्षरों की ध्वनि निकलती है तीन अक्षरों में त्रिदेव यानी कि ब्रह्मा विष्णु महेश का वास मानागया है ओम वह शक्ति है जो बुराई को जड़ से मिटा देती है ।ओम के उच्चारण से धर्म अर्थ काम मोक्ष इन चारों पुरुषार्थ की प्राप्ती होती है। किसी भी मंत्र की शुरुआत में ओम अवश्य लगाया गया है|

ओम ॐ की त्रिविध ध्वनि :-

ओम ॐ संस्कृत के तीन अक्षरों से मिलकर बना है ।

– (सृजन) ,आरंभ, और शुरुआत का प्रतीक है। ब्रह्मा (सृजनकर्ता) जो सृष्टि के रचयिता माने जाते हैं।

उ – (पालन) पोषण और स्थिति का प्रतीक है। विष्णु (पालनकर्ता) जो सृष्टि के पालनहार माने जाते हैं।

– (संहार / लय) यह जीवन के अंत समय को दर्शाता है। महेश (संहारकर्ता) जो सृष्टि का संहार करते है।

यह तीन ऐसी मूल ध्वनि है जो सदा हमारे चारों ओर मौजूद रहती है। ‘ॐ’ का ध्यान करने से शरीर के ये तीन खास चक्र जैसे नाभि , हृदय और आज्ञा ये तीनों जागते हैं और हमें अंदर से शक्तिशाली, शांत और समझदार बनाते हैं।

ओम ॐ की उत्पत्ति :-

ॐ की उत्पत्ति और महत्व भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं और वेदों में से पता चलती है “ॐ को ब्रह्मांड की शुरुआत की पहली आवाज़ माना गया है, और माना जाता है कि बाकी सारी ध्वनियाँ इसी एक ध्वनि से बनी हैं। ऋग्वेद में सबसे पहले उल्लेख मिलता है जबकि उपनिषदों में इसका ब्रह्म जो की सृष्टि के रचयिता है इसे सबसे बड़ी शक्ति माना गया है।

” ओम को प्रणव कहा गया है जिसका अर्थ है वो ब्रह्मांड जो आपको अंदर से हिला दे, माना जाता है कि जब ब्रह्मांड का निर्माण हुआ तो सबसे पहले ओम की ध्वनि उत्पन्न हुई जो दुनियां की शुरुआत का प्रतीक है । यह भूत वर्तमान और भविष्य जैसे तीन कालो का प्रतीक है और भूलोक, स्वर्ग लोक और पाताल लोक जैसे लोको का भी प्रतीक है। यह ध्वनि पूरे ब्रह्मांडीय में फैली हुई है।

ओम ॐ का वैज्ञानिक महत्व:-

ओम om शिव का नाद है जो संपूर्ण ब्रह्मांड की ध्वनि को दर्शाता है। आज विज्ञान भी मानता है कि ॐ की ध्वनि से मानसिक शांति और ऊर्जा मिलती है।

Einstein यही कह कर गए हैं कि ब्राह्मण फेल रहा है Einstein से पहले भगवान महावीर ने कहा था महावीर से पहले वेदों में इसका उल्लेख मिलता है महावीर ने वेदों में पढ़ कर नहीं कहा था ,उन्होंने ध्यान की गहराइयों में जाकर देखा तब कहा खगोल वैज्ञानिकों ने प्रमाणित किया है कि हमारे अंतरिक्ष में पृथ्वी मंडल सौरमंडल सभी ग्रह मंडल तथा अनेक आकाशगंगा लगातार ब्रह्मांड का चक्कर लगा रही है। क्या सभी आकाशीय पिंड कई हजार मील प्रति सेकंड की गति से अनंत की और भागे जा रहे हैं जिससे लगातार एक ध्वनि उत्पन्न हो रही है।

इसी ध्वनि को हमारे तपस्वी और ऋषि महरीशियों ने अपनी ध्यान अवस्था में सुना है जो लगातार सुनाई देती रहती है शरीर के भीतर भी और बाहर भी हर कहीं यही ध्वनि जा रही हैं। ॐ ।।

ॐ आकृति वाला मंदिर:-

ओम om की आकृति का पहला शिव मंदिर विश्व का सबसे बड़ा ओम मंदिर है यह राजस्थान के पाली जिले से 22 किलोमीटर दूर जाड़न गांव में स्थित है ओम की आकृति के इस मंदिर का निर्माण कार्य 1995 में शुरू हुआ था इस ओम आश्रम में भगवान शिव की 1008 अलग-अलग प्रतिमाएं स्थापित की गई है सबसे ऊपर वाले भाग में महादेव का शिवलिंग स्थापित है शिवलिंग के ऊपर ब्रह्मांड की आकृति बनाई गई है।

ॐ ध्वनि से मन की एकाग्रता:-

जब हम ॐ बोलते हैं, तो हमें बहुत ध्यान से बोलना चाहिए, क्योंकि यह ब्रह्मांड की सबसे पहली और खास ध्वनि मानी जाती है। इसी शब्द से सभी प्रकार के कार्य संपादित होते हैं । इस दुनिया की शुरुआत, उसका ठीक से चलना और समय के साथ उसका बदलना — ये सब ॐ से जुड़े हुए हैं ओम के द्वारा ही संचालित होते हैं।

भगवान श्री कृष्ण ने भागवत गीता में भी कहा है ओम om कार की ध्वनि ही मेरी सच्ची पहचान ब्रह्मांड को चलने वाली यह ध्वनि ही मूल शक्ति है । यह हमारे अंदर सात्विकता को बढ़ाता है सतोगुण जितना व्यक्ति के अंदर बढ़ता जाएगा उतना ही उसका तमोगुण,रजोगुण से आशक्ति समाप्त हो जाएगी उसके जीवन में सात्विकता पूर्णता शांति आ जाएगी जो कि उसके जीवन को सुंदर और आनंदित बना देती है ओंकार की ध्वनि का ठीक से उच्चारण करने से मन बिल्कुल शांत रहता है।

आयुर्वेद के अंतर्गत :-

आयुर्वेद के अनुसार राजपूत और कफ हमारे शरीर को संतुलित रखते हैं जब इन तीनों का संतुलन बिगड़ा है तभी हम बीमार होते हैं और ओम का जाप करने से वाक्य पर संतुलन में आते हैं और वात ,पित्त और कफ अगर संतुलित होंगे तो शरीर पर एक सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा कोई बीमारी नहीं होगी और स्वस्थ रहेंगे और शरीर में प्राण वायु का स्तर बढ़ेगा

ओम मंत्र ॐ Om Mantra के जाप करने के फायदे:-Om meditation –

1.जब भी हम ओम om मंत्र का जाप या उच्चारण करते है तो इसे जो तीन शब्द है अ, उ, और म इन तीन शब्दों के vibration से हमारे शरीर के विभिन्न अंगों और चक्रों पर अधिक प्रभाव होते है जैसे ‘अ’ बोलने पर हमारा पेट और गुप्तांगों पर होता है यानी मूलाधार और मणिपुर कंपन (vibration )होता है ‘उ’ का उच्चारण करने से हृदय याकि अनाहत चक्र और गल के पास विशुद्ध चक्र पर कंपन होता है और ‘म’ का उच्चारण करने पर मस्तिष्क और तृतीय नेत्र के पास आज्ञा चक्र पर कंपन होता है इस कंपनी से हमारे चक्र जागृत होते हैं और वह अंग स्वस्थ होते हैं और सही रूप से काम करते हैं।

2. ओम om का उच्चारण से आपकी सांस गहरी हो जाएगी और आप ज्यादा से ज्यादा oxygen अपने lungs और शरीर के अंदर खींचोगे और carbondioxide बाहर निकालोगे जिससे आपके शरीर का detoxification होगा और शरीर व lungs की गंदगी बाहर आएगी और lungs मजबूत हो जाएंगे ।

3. जब हम ओम om का उच्चारण करते हैं और गहरी सांस लेते हैं तो सांसों के साथ-साथ प्राण शक्ति भी हमारे भीतर जाती है हमारी सांसे एक ट्रक के भांति प्राण ऊर्जा को साथले जाती है और उसे वहां छोड़कर वापस आ जाती है ओम का उच्चारण करने से यह प्राण ऊर्जा शरीर मे ऊपर की तरफ़ उठती है और हमें तारों ताजा रखतीं है।

4.मन शांत होता है ओम के उच्चारण में जो आखिरी म की आवाज आती है। जिससे हमारे शरीर में कंपन होता है और हमारा मन शांत होना शुरू हो जाता है यह वैसे ही काम करता है जैसे भ्रामरी प्राणायाम करने से फायदा होता है।

5. हमारे शरीर के चारों तरफ एक आभामंडल होता है वास्तव में या हमारे आंतरिक ऊर्जा विचार स्वास्थ्य आदि का ही परिचायक होता है अगर हम ओम का उच्चारण करते हैं तो इससे हमारे Aura की सफाई होती है और हमारा शरीर स्वस्थ होता जाता है।

6. ओम om का उच्चारण करने से केवल हम ही नहीं हमारे आसपास के लोग और वातावरण भी शुद्ध होता है यानी इसका प्रभाव हमारे आसपास के वातावरण पर भी पड़ता है।

7. Om mantra benifits ओम Om के उच्चारण से हमारा concentration level बहुत अच्छा हो जाता है जिससे हमारे काम बेहतर ढंग से होते हैं और हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं

निष्कर्ष:-

ॐ सनातन धर्म का बीज मंत्र है, ओम मन और आत्मा को शांति देता है ।आत्मा को परमात्मा से मिलाता है। जीवन की शुरुआत से लेकर तो अंत तक का ओम प्रतीक है हम नहीं थे तब भी ओम om था और हम नहीं रहेंगे तब भी ओम रहेगा।

ओम Om मंत्र का meditation करने से हमारा शरीर स्वस्थ रहता है और मन भी शांत रहता है और एकाग्रता बढ़ती है ,जिससे हम सफलता की और बढ़ते जाते हैं और ओम का जाप करने से sketching sketching power बढ़ती है , जिससे कि विद्यार्थियों को भी पढ़ाई में मदद मिलती है । इसका नियंत्रित जप हमारे जीवन में सकारात्मकता लाता है ।

ओम का उच्चारण करने से आध्यात्मिक यात्रा का अनुभव होगा और विभिन्न अनुभवों से गुजरेंगे आपके जीवन में खुशी और शांति की वृद्धि होगी।

अगर आपको यह लेख उपयोगी लगा हो, तो कृपया इसे शेयर करें और अपने अनुभव कमेंट में ज़रूर बताएं। 🙏

Share it :

One Response

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest Post